Wednesday, July 22, 2026

आँगन और छत

             आँगन की ये ख़्वाहिश है कि रिमझिम की हो बरसात
                और छत का तक़ाज़ा है कि इक बूँद न बरसे 
                                                    (अज्ञात लेखक )  

भावार्थ:
जीवन में अक्सर ऐसा होता है कि जो चीज़ किसी एक के लिए सुख का कारण होती है, वही किसी दूसरे के लिए चिंता या कष्ट का कारण बन सकती है। 
जैसे आँगन चाहता है कि रिमझिम वर्षा हो। जिसमें सारा कूड़ा-कचरा बह जाए और घास और पौधों को पानी भी मिल जाए। 
लेकिन घर की जर्जर छत प्रार्थना करती है कि बारिश की एक बूँद भी न गिरे। 

अर्थात, कभी कभी जीवन की परिस्थितियाँ और मजबूरियाँ ऐसी होती हैं कि एक ही घर में दो विपरीत इच्छाएँ साथ-साथ रहती हैं। 
इसलिए जीवन में कोई भी निर्णय लेते समय इच्छाओं के साथ-साथ परिस्थितियों का भी ध्यान रखना आवश्यक है। 
केवल अपनी चाहत और परिस्थिति का ही नहीं, बल्कि दूसरों की परिस्थितियों और आवश्यकताओं को भी समझने का प्रयास करना चाहिए। 
                                              " राजन सचदेव "

1 comment:

Courtyard and the Roof

           Aangan ki yeh khwahish hai ki rim jhim ki ho barsaat                 Aur chhat ka taqaazaa hai ki ik boond na barsay             ...