आँगन की ये ख़्वाहिश है कि रिमझिम की हो बरसात
और छत का तक़ाज़ा है कि इक बूँद न बरसे
(अज्ञात लेखक )
भावार्थ:
जीवन में अक्सर ऐसा होता है कि जो चीज़ किसी एक के लिए सुख का कारण होती है, वही किसी दूसरे के लिए चिंता या कष्ट का कारण बन सकती है।
जैसे आँगन चाहता है कि रिमझिम वर्षा हो। जिसमें सारा कूड़ा-कचरा बह जाए और घास और पौधों को पानी भी मिल जाए।
लेकिन घर की जर्जर छत प्रार्थना करती है कि बारिश की एक बूँद भी न गिरे।
अर्थात, कभी कभी जीवन की परिस्थितियाँ और मजबूरियाँ ऐसी होती हैं कि एक ही घर में दो विपरीत इच्छाएँ साथ-साथ रहती हैं।
इसलिए जीवन में कोई भी निर्णय लेते समय इच्छाओं के साथ-साथ परिस्थितियों का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
केवल अपनी चाहत और परिस्थिति का ही नहीं, बल्कि दूसरों की परिस्थितियों और आवश्यकताओं को भी समझने का प्रयास करना चाहिए।
" राजन सचदेव "
Esa jivan dass ka bhi bna do ji
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