काश ऐसा हो कि हमसे कोई न रुठे
जीवन में अपनों का कभी साथ न छूटे
विश्वास की डोरी से बंधे होते हैं रिश्ते
'राजन' ये रिश्तों की कभी डोर न टूटे
" राजन' सचदेव "
जब नाव जल में छोड़ दी तूफ़ान में ही मोड़ दी दे दी चुनौती सिंधु को फिर धार क्या मझधार क्या कह मृत्यु को वरदान ही मरना लिया जब ठान ही फिर जीत ...
🙏🙏🙏
ReplyDeleteAmen!!!
ReplyDeleteWah wah ji mahapurso ji🙏🙏🙏
ReplyDelete🙏🏻🙏🏻
ReplyDelete🙏🙏
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