काश ऐसा हो कि हमसे कोई न रुठे
जीवन में अपनों का कभी साथ न छूटे
विश्वास की डोरी से बंधे होते हैं रिश्ते
'राजन' ये रिश्तों की कभी डोर न टूटे
" राजन' सचदेव "
(Scroll down for English version) एक अनेक ब्यापक (व्यापक) पूरक जत्त देखूं तत सोई । माया चित्र बचित्र बिमोहित, विरला बूझै कोई ।। सब गोविन्द...
🙏🙏🙏
ReplyDeleteAmen!!!
ReplyDeleteWah wah ji mahapurso ji🙏🙏🙏
ReplyDelete🙏🏻🙏🏻
ReplyDelete🙏🙏
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