Thursday, October 31, 2019

इन्सान की पहचान Insaan ki Pehchaan

कैसे हो पायेगी अब - इन्सान की पहचान
नकली हो गए हैं दोनों - आँसू और मुस्कान

Kaisay ho paayegi ab insaan ki pehchaan
Nakali ho gaye hain Dono - Aansu aur muskaan

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...