Tuesday, November 24, 2020

संस्कृत भाषा की सुंदरता

क्या आप जानते है विश्व की सबसे ज्यादा समृद्ध भाषा कौनसी है ??

अंग्रेजी में एक प्रसिद्ध वाक्य है:
THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG
जिसमें अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर समाहित कर लिए गए हैं। मज़ेदार बात यह है की अंग्रेज़ी में कुल 26 अक्षर ही उप्लब्ध हैं जबकि इस वाक्य में 33 अक्षरों का प्रयोग किया गया है। जिसमें चार बार O और A, E, U तथा R अक्षर का प्रयोग क्रमशः 2 बार किया गया है। इसके अलावा इस वाक्य में अक्षरों का क्रम भी सही नहीं है। जहां वाक्य T से शुरु होता है वहीं G से खत्म हो रहा है।

अब ज़रा संस्कृत के इस श्लोक को पढिये।-

              क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोSटौठीडढण:।
             तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।


अर्थात: पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन ? राजा मय ! 
जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं।

श्लोक को ध्यान से पढ़ने पर आप पाते हैं की संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजन इस श्लोक में दिखाई दे रहे हैं वो भी क्रमानुसार। 
यह खूबसूरती केवल और केवल संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा में ही देखने को मिल सकती है!

पूरे विश्व में केवल एक संस्कृत ही ऐसी भाषा है जिसमें केवल एक अक्षर से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है। 
किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल “न” व्यंजन से अद्भुत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल्य प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने थोडे में बहुत कहा है-

               न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नानानना ननु।
               नुन्नोऽनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नुन्ननुन्ननुत्॥


अर्थात: 
जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। 
ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। 
घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते 
और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है। 
          वंदेसंस्कृतम्!

एक और उदहारण है।

               दाददो दुद्द्दुद्दादि दादादो दुददीददोः
               दुद्दादं दददे दुद्दे ददादददोऽददः


अर्थात: 
दान देने वाले, खलों को उपताप देने वाले, शुद्धि देने वाले, दुष्ट्मर्दक भुजाओं वाले, दानी तथा अदानी दोनों को दान देने वाले, राक्षसों का खंडन करने वाले ने शत्रु के विरुद्ध शस्त्र को उठाया।
                                    लेखक - अज्ञात
                                                     Writer unknown  
                                       (Courtesy of Madhu Desai)

6 comments:

  1. Thats why it is called Girvaan Bharati...the language of God's.. absolutely perfect..thanks

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  2. Dhan Nirankar.
    Proves all the reasons I love our language and heritage 🙏🙏🙏

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  3. Amazing , speechless 😶🙏🙏🙏🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️

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Education is an admirable thing,    But it is well to remember from time to time -         That nothing that is worth knowing can be taught....