तुम प्यार की सौगात लिए घर से तो निकलाे
रस्ते में तुम्हें कोई भी दुश्मन न मिलेगा
'अनवर जलालपुरी'
Tum pyaar ki saugaat liye ghar say to nikalo
Rastay me tumhen koi bhi dushman na milega
'Anwar Jalaalpuri'
सुख़नवरी में बस इतना कमाल वाजिब हो अधूरी बात में पूरा ख़्याल वाजिब हो ख़ुदा करे कि मैं उस ज़ावीऐ से देख सकूं जहां से आपके अंदर का हाल वाजिब ह...
Nice thought ji.....it's true....Dhan Nirankar ji
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