Monday, April 5, 2021

कश्ती तो वही है मगर Kashti to vahi hai

कश्ती तो वही है मगर दरिया बदल गया
मेरी तलाश का भी तो ज़रिया बदल गया

न शकल ही बदली न बदला मेरा किरदार
लोगों के देखने का नज़रिया बदल गया

Kashti to vahi hai magar dariya badal gayaa
Meri talaash ka bhi to zariyaa badal gayaa

Na shakl hi badali - na badlaa mera kirdaar
Logon kay dekhnay ka nazariyaa badal gayaa

                                          'Writer unknown'

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...