Wednesday, March 3, 2021

एक पृष्ठ के कारण किताब बंद न करें

कहते हैं कि इंसान ग़लतियों का पुतला है।

हर इंसान में कोई न कोई त्रुटि - कोई कमी - कोई दोष अवश्य होता है
और सभी से जीवन में कभी न कभी - कहीं न कहीं कोई ग़लती हो ही जाती है 
कोई भी इंसान हर तरह से  पूर्ण नहीं होता।

लेकिन, ग़लती जीवन के एक वरक - एक पन्ने की तरह होती हैं और रिश्ते पूरी किताब की तरह।
किसी एक पृष्ठ के कारण पूरी किताब को बंद कर देना कोई अच्छी या समझदारी की बात नहीं।

                                            ' राजन सचदेव '

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...