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राह-ए-हक़ पे चलने का हक़ तो सभी को है आगे बढ़ते रहने का हक़ तो सभी को है आपकी मर्ज़ी है मानो या ना मानो, पर बात अपनी कहने का हक़ तो सभी को है दो...
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