राह-ए-हक़ पे चलने का हक़ तो सभी को है
आगे बढ़ते रहने का हक़ तो सभी को है
आपकी मर्ज़ी है मानो या ना मानो, पर
बात अपनी कहने का हक़ तो सभी को है
दोष ना दीजे बरसता देख बादल को
दिल को हल्का करने का हक़ तो सभी को है
सोच सब की अपनी है - अपने ख़्याल हैं
अपने ढंग से रहने का हक़ तो सभी को है
देख कर उड़ता किसी को रश्क़ ना कीजे
'राजन' ऊँचा उठने का हक़ तो सभी को है
" राजन सचदेव "
रश्क़ = ईर्ष्या Jealousy, Envy
Wah wah ji...nice poetery
ReplyDeleteAshok Chaudhary
Thank you
DeleteWAH KYA BAT HAI MERE SAJN PYARE MAHAN MAHAN MAHAN VIDVAN MAHAN SHAYER SATKAR YOG .."RAJN SCHDEVA "JEE
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