Beautiful thought.
कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग । कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास । कब...
Beautiful thought.
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