जनाज़े को उनके वो रुकवा के बोले
ये लौटेंगे कब तक - कहां जा रहे हैं ?
जवाब मिला
आए थे दुनिया में दिन चार लेकर
जहां से चले थे - वहां जा रहे हैं
कबीर एह तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास एह तन जलता देख के भयो कबीर...
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