Tuesday, May 1, 2018

शीशा और पत्थर साथ रहें Sheesha aur Patthar Saath Rahen

शीशा और पत्थर साथ रहें  - तो बात नही घबराने की
बस, दोनों ही ज़िद ना करें कभी आपस में टकराने की

Sheesha aur patthar saath rahen to baat nahin ghabraanay ki
Bus, dono hi zid na karen - kabhi aapas may takraanay ki 

2 comments:

  1. दिल मे कुछ अरमान थे
    मगर बेदर्द इंसान थे

    अपना गुजारा कैसे होता
    कांच का दिल था पत्थर के मकान थे.

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...