Monday, November 25, 2024

Sab hain Musafir Yahan - Everyone is a Traveler Here

Duniya hai Saraay Faani Sab hain Musafir yahan 
Roz koyi Aa raha hai -- Roz koyi Ja raha
                  ~~~~~~~~~~~~~

The world is a temporary inn - everyone is a traveler here
Every day, someone is coming  - and someone is leaving

सब हैं मुसाफ़िर यहां

दुनिया है सराय फ़ानी सब हैं मुसाफ़िर यहां 
रोज़ कोई आ रहा है - रोज़ कोई जा रहा 
           ~~~~~~~~~~~~~

Friday, November 22, 2024

सब कुछ बदल जाता है उम्र के साथ Everything changes with age

सब कुछ बदल जाता है उम्र के साथ 
            पहले कुछ पाने की कोशिश करते थे  - 
                           अब सब्र करने की कोशिश करते हैं 

Everything changes with age
          Earlier - we used to try to achieve something -
                                            Now - we try to let go and be patient  

Thursday, November 21, 2024

कभी वो पास आते हैं - कभी वो दूर

कभी वो पास आते हैं  - कभी वो दूर जाते हैं 
कभी हम को हंसाते हैं कभी हम को रुलाते हैं 
ये दुनिया है यहां 'राजन' सभी मतलब के साथी हैं 
बड़ी मुश्किल से मिलते हैं वो जो रिश्ता निभाते हैं 
                            " राजन सचदेव "

Kabhi vo paas aatay hain - Sometimes, they come close

Kabhi Vo Paas aatay hain - Kabhi Vo Door jaatay hain  
Kabhi Hum ko hansaatay hain - kabhi hum ko rulaatay hain  
Ye duniya hai yahan 'Rajan' sabhi matlab kay saathi hain 
Badi mushkil say miltay hain Vo jo rishtaa nibhaaty hain 
                         " Rajan Sachdeva "
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Sometimes, they come close and sometimes, they go away.
Sometimes they make us laugh - sometimes they make us cry.
In this world, everyone is after their own interest, says Rajan.
It is hard to find people who maintain a good selfless relationship forever. 

Friday, November 15, 2024

Thursday, November 14, 2024

Who is Lord Krishn कौन और क्या हैं भगवान कृष्ण

Anupam Kher explains 
            Who or what is Lord Krishn 


 कौन और क्या हैं भगवान कृष्ण  -- अनुपम खैर 

With English subtitles  ⬇️





Wednesday, November 13, 2024

रावण का ज्ञानी होना महत्वपूर्ण नहीं

रावण का ज्ञानी और महा-पंडित होना महत्वपूर्ण नहीं है। 

महत्व इस बात का नहीं है कि रावण विद्वान और ज्ञानी था। 
महत्वपूर्ण बात ये है कि एक महा विद्वान और ज्ञानी भी रावण हो सकता है। 

ज्ञान के साथ साथ भावना और कर्म का पवित्र होना भी आवश्यक है। 

Ravan being a Gyani is not important

Ravan being a Gyani is not important. 

It is not important that Ravan was a great scholar and a Gyani Pandit.
The important thing is that a Gyani and a great scholar can also become a Ravan.

Along with Gyan and knowledge, sentiments and actions must also be pure. 


Monday, November 11, 2024

दर्पण के सामने - भगवान कृष्ण

एक बार, भगवान कृष्ण आईने के सामने खड़े थे अपने बालों और पोशाक को ठीक कर रहे थे।
वह अपने सिर पर विभिन्न मुकुटों को सजा कर देख रहे थे और कई सुंदर रत्न-जड़ित गहने पहन कर स्वयं को निहार रहे थे। 
उनका सारथी रथ तैयार करके बाहर इंतजार कर रहा था।

बहुत देर इंतजार करने के बाद सारथी सोचने लगा कि अक्सर कहीं जाना होता है  तो भगवान कृष्ण बहुत जल्दी तैयार हो कर बाहर आ जाते हैं।
लेकिन आज इतना समय बीत जाने के बाद भी वे अभी तक अपने कमरे से बाहर नहीं आए। 
हो सकता है कि उन्होंने बाहर जाने का विचार स्थगित कर दिया हो। 
क्योंकि कृष्ण स्वभाव से ही अप्रत्याशित (Unpredictable) थे और उनके कार्य अक्सर अनपेक्षित (Unexpected) होते थे। 
वो किसी भी समय तत्क्षण ही अप्रत्याशित रुप से कोई निर्णय ले लेते थे। और एक क्षण में ही सब कुछ बदल भी सकता था। 
ऐसा सोच कर वह भगवान कृष्ण के कक्ष में चला गया और देखा कि वह दर्पण के सामने खड़े होकर स्वयं को निहार रहे हैं।

उसने विनम्रता से पूछा, "भगवन, आज आप इतने कीमती कपड़े और आभूषण पहन कर - इतने सज धज कर कहाँ जा रहे हैं?
भगवान कृष्ण ने कहा - आज मैं दुर्योधन से मिलने जा रहा हूं।
आश्चर्य चकित सारथी ने पूछा - 
"प्रभु - आश्चर्य  है कि आप दुर्योधन से मिलने के लिए इतने सज धज कर जा रहे हैं? 

भगवान कृष्ण ने कहा: हाँ भद्र  - क्योंकि वह मेरे अंदर नहीं देख सकता।
वह केवल मेरे बाहरी रुप की ही सराहना कर सकता है।
केवल अच्छे कपड़े - हीरे और रत्न जड़ित आभूषण इत्यादि ही उसे प्रभावित कर सकते हैं। 
वो किसी के अंतर्मन और ज्ञान को परखने - और भावनाओं को समझने में असमर्थ है। 
वो तो केवल बाहरी वस्त्र और आभूषण देख कर ही किसी व्यक्ति का मूल्यांकन करने का आदी है। 
इसलिए उसे प्रभावित करने के लिए ये सब आभूषण पहनना आवश्यक है "

सारथी ने फिर कहा - 
लेकिन प्रभु - आप दुर्योधन के पास क्यों जा रहे हो? 
आपको उसके पास नहीं - बल्कि उसे आपके पास आना चाहिए। 
आप तो जगत के स्वामी हैं। उसकी तुलना आपके साथ नहीं हो सकती। 
मेरे विचार में यह सही नहीं है। आपको उसके पास नहीं जाना चाहिए।"

कृष्ण पीछे मुड़े - सारथी की ओर देख कर मुस्कुराए और बोले -
     "भद्र - अंधेरा कभी प्रकाश के पास नहीं आता। 
          प्रकाश को ही अंधकार के पास जाना पड़ता है।"
                                     ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                                    ' राजन सचदेव '

Michhami Dukkadam मिच्छामी दुक्कड़म

I ask your forgiveness if I ever hurt you with any of my words, actions, or thoughts.  Michhami Dukkadam is an ancient traditional Jain phra...