Saturday, September 5, 2026

शिक्षक दिवस और डॉ: सर्वपल्ली राधाकृष्णन जयंती

आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन की स्मृति में 'शिक्षक दिवस' मनाया जा रहा है।
1962 में, जब राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति थे, तो उनके जन्मदिन को 'राधाकृष्णन दिवस' के रुप में मनाने का प्रस्ताव रखा गया।
लेकिन उन्होंने मना कर दिया और कहा: "इसे मेरे जन्मदिन के तौर पर मनाने के बजाय, अगर इस दिन को 'शिक्षक दिवस' के रुप में मनाया जाए तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।"

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (5 सितंबर, 1888 - 17 अप्रैल, 1975) एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। शिक्षा और भारतीय दर्शन में उनका योगदान अद्वितीय है। वे वर्तमान काल  में भारतीय और पश्चिमी दर्शन के सबसे बड़े विद्वानों में से एक थे। उन्होंने भारतीय दर्शन और वेदांत पर कई किताबें लिखीं, जिनमें भगवद गीता, उपनिषद और ब्रह्म सूत्र पर लिखी गई टीकाएँ शामिल हैं। 

एक महान शिक्षक और दार्शनिक होने के अलावा, डॉ. राधाकृष्णन बहुत ही हंसमुख और हाजिरजवाब इंसान भी थे!! 
उनके बारे में इंटरनेट पर खोजते समय, मुझे उनके दिए गए कुछ बेहतरीन और मजेदार जवाब मिले। 
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जब ग्रीस के राजा राजकीय यात्रा पर भारत आए तो राष्ट्रपति राधाकृष्णन ने पालम हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।
"महामहिम... आप ग्रीस के पहले ऐसे राजा हैं जो हमारे निमंत्रण पर भारत के मेहमान बन कर आए हैं!!!!
वरना सिकंदर तो बिना निमंत्रण ही आ गया था।" 
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 एक बार चाय पीते समय विंस्टन चर्चिल ने डॉ. राधाकृष्णन से कहा:
'Sugar' (शूगर) एकमात्र ऐसा अंग्रेजी शब्द है जिसमें "स" शब्द का उच्चारण "श " की तरह होता है!!
डॉ. राधाकृष्णन ने मजाक में कहा: "Are you Sure? (क्या आप श्योर हैं?)
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एक बार विंस्टन चर्चिल ने डॉ. राधाकृष्णन के सम्मान में एक राजकीय भोज (State Banquet) का आयोजन किया।
डॉ. राधाकृष्णन ने खाना खाने से पहले अपने हाथ धोए और हाथ से खाना खाया, जबकि चर्चिल ने चम्मच और कांटे (spoons and forks) का इस्तेमाल किया..!!
चर्चिल ने डॉ. राधाकृष्णन को चम्मच और कांटे का इस्तेमाल करने की सलाह दी और कहा कि चम्मच और कांटे ज़्यादा साफ़-सुथरे (hygienic) होते हैं। 
डॉ. राधाकृष्णन ने जवाब दिया...
"हो सकता है कि ये चम्मच किसी और ने भी इस्तेमाल किये हों लेकिन खाना खाने के लिए मेरे हाथ का इस्तेमाल कोई और नहीं कर सकता, इसलिए मेरा हाथ आपके इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी चम्मच या कांटे से ज़्यादा स्वच्छ और साफ़-सुथरा है।"
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विदेश यात्रा के दौरान, दर्शकों में से एक व्यक्ति ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से एक सवाल पूछा।
"स्टेशन मास्टर और स्कूल मास्टर में क्या फ़र्क है?"
यह सवाल बेमतलब का था और थोड़ा बदतमीज़ी भरा भी!
लेकिन, बुद्धिमान डॉ. राधाकृष्णन ने शांति से जवाब दिया...
"स्टेशन मास्टर ट्रेन का चालन करता है, जबकि स्कूल मास्टर दिमाग को ट्रेन (प्रशिक्षित) करता है!!"



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