Friday, September 4, 2026

शुभ जन्माष्टमी: भगवान कृष्ण और भगवद गीता

जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रुप में मनाई जाती है, जिन्हें न केवल ईश्वर का अवतार बल्कि 'जगद्गुरु' भी माना जाता है।
लाखों लोगों के लिए कृष्ण एक प्रिय आराध्य देवता हैं। 
कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में भगवान कृष्ण द्वारा भगवद गीता के रुप में दिया गया अर्जुन को उपदेश - पूरी दुनिया में एक अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक ग्रन्थ माना जाता  है। जिसने भारत के सभी धर्मों और पंथों - जिनमें बौद्ध धर्म, सिख धर्म और उनकी कई शाखाएं शामिल हैं - को प्रभावित किया और उन्हें आकार दिया। 
भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है; यह धर्म, कर्म, ज्ञान, भक्ति, कर्तव्य, अनासक्ति और आत्मा के स्वरुप की गहरी खोज से सम्बन्धित दर्शन शास्त्र एवं महाग्रंथ है और जिस का संदेश आज के समय में भी बहुत प्रासंगिक है।

भगवद गीता सिखाती है कि हम हमेशा अपने जीवन की और आसपास की परिस्थितियों को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन हम उन पर अपनी प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकते हैं। 
और हमें किसी विशेष परिणाम की इच्छा के गुलाम बने बिना अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना चाहिए। 
भगवद गीता सिखाती है कि हमें भय, अनुचित मोह, अहंकार और स्वार्थ से ऊपर उठ कर  अपने भीतर के गहरे सत्य की खोज करनी चाहिए।

दुनिया भर में करोड़ों लोग जन्माष्टमी के पर्व को अलग-अलग तरीकों से मनाते और सम्मानित करते हैं - प्रार्थनाओं, भक्ति गीतों, उपवास, उत्सवों और धार्मिक समारोहों के माध्यम से। लेकिन उनके जीवन चरित्र, बचपन के खेल, रिश्तों और उनके दिव्य रूपों की कथा कहानियों से परे है: उनकी गहन शिक्षाएं। 
भगवान कृष्ण को श्रद्धांजलि देने के लिए केवल उनके जन्म को याद करने से कहीं बढ़कर आवश्यक है उनकी शिक्षाओं को सीखना, समझना और उन्हें अपने जीवन में अपनाना।
गुरुओं, अवतारों एवं महान शिक्षकों की सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनकी पूजा करना नहीं है, बल्कि उनके दिखाए रास्ते पर चलना है। 
                               " राजन सचदेव "





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"No one is too tall to see tomorrow  And no one is too rich to buy yesterday.  So, be humble and appreciate life the way it is." W...