Wednesday, December 17, 2025

पत्थर में इक कमी है -

पत्थर में इक कमी है - 
             वो पिघलता नहीं है
पर इक ख़ूबी भी है -  
             वो बदलता नहीं है 
     ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

न पिघलना पत्थर की कमजोरी मानी जा सकती  है।
लेकिन यही इसकी ताकत भी है:
अपरिवर्तित रहने का साहस। 
जहां आज का समाज पिघलने और बदलने की मांग करता है -
वहीं पत्थर हमें अपने सिद्धांतों पर कायम रहने की प्रेरणा देता है - 
दबाव का विरोध करने का साहस -
और सत्य की विचारधारा के प्रति दृढ रह कर अपने उसूलों पर क़ायम रहने का संदेश देता है। 
                         " राजन सचदेव " 

8 comments:

उस ज़ावीऐ से देख सकूं To see from such a perspective

सुख़नवरी में बस इतना कमाल वाजिब हो  अधूरी बात में पूरा ख़्याल वाजिब हो  ख़ुदा करे कि मैं उस ज़ावीऐ से देख सकूं  जहां से आपके अंदर का हाल वाजिब ह...