Wednesday, February 25, 2026

शेख हयाती जग ना कोई थिर रहिया - कोई भी सदा के लिए नहीं रहता

                     शेख हयाती जग - ना कोई थिर रहिया 
                     जिस आसन हम बैठे केते बैस गया
                                             ' शेख फरीद"
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ऐ शेख, इस संसार में कोई भी सदा के लिए नहीं रहा।
जिस आसन, जिस गद्दी पर हम आज बैठे हैं, उस पर पहले भी कितने ही लोग बैठकर जा चुके हैं। 
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भावार्थ: 
इस संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है — न धन, न सत्ता, न कोई ऊँचा पद और प्रतिष्ठित पदवी।  

जिस सिंहासन, गद्दी या कुर्सी पर आज कोई व्यक्ति बैठा है, उस गद्दी पर पहले भी कई और लोग बैठ चुके हैं — 
पहले भी अनेक लोग उस पद पर रह चुके हैं। 
और वो सब के सब इस संसार से विदा हो गए, क्योंकि स्वयं जीवन भी स्थायी नहीं है।  

लेकिन फिर भी, जब भी कोई व्यक्ति किसी ऊँचे पद पर पहुँच जाता है, वह स्वयं को अजेय, अटल और सर्वशक्तिमान समझने लगता है। 
वह सोचने लगता है कि वह अजेय है, जिसे कोई नहीं हरा सकता - वह सारी दुनिया को कंट्रोल कर सकता है और अपनी मनमानी कर सकता है। 

शेख फ़रीद हमें जीवन की नश्वरता का स्मरण कराते हैं।  
हमें याद दिलाते हैं कि हम चाहे किसी भी पद अथवा प्रतिष्ठित आसन पर विराजमान हों -  एक दिन हमें भी यह संसार छोड़कर जाना है। 
धन, पद, प्रतिष्ठा इत्यादि सब यहीं पर रह जाएंगे  - कोई नहीं बचा पाएगा और हम ख़ाली हाथ संसार से विदा हो जाएंगे। 

इसलिए मनुष्य को अहंकार भाव से नहीं - बल्कि विनम्रता में रहना चाहिए। 
हर समय दूसरों को जांचने, परखने और उनकी आलोचना करने की बजाए उनकी भावनाओं को विशाल एवं करुणापूर्ण ह्रदय से समझते हुए विनम्र भाव से अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए। 
                     "राजन सचदेव "

5 comments:

  1. Very true. We should make good use of the resources available to us. Along the same thought Sant Kabir said आये हैं सो जायेंगे, राजा रंक फकीर। एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बँधे जात जंजीर।। inspiring to make good use of this life 🙏

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  2. जब तक आसन है तब तक तो मजा ले लो जी

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  3. Very nice motivated message 🌹🙏🌷

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