दीपावली - प्रकाश का पर्व
केवल घरों को नहीं, मन को भी प्रकाशित करें
दीपावली, जिसे आम तौर पर दिवाली भी कहा जाता है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है। और भारत के लगभग सभी प्रमुख धर्म इस दिन को अपने अपने इतिहास की किसी विशेष घटना से जोड़कर मनाते हैं।
वैसे प्रकाश का यह उत्सव केवल भारत तक ही सीमित नहीं है।
दुनिया भर की विभिन्न संस्कृतियों में प्रकाश और अग्नि से जुड़े त्योहार मनाए जाते हैं, जैसे कि क्रिसमस, हनुक्का, सेंट लूसिया डे, और थाईलैंड का 'लोई क्राथोंग' इत्यादि।
प्राचीन काल से ही, मानव जाति सूर्य के प्रकाश और उसकी शक्ति से प्रभावित और आकर्षित रही है, और हमेशा ही इसे जीवन का स्रोत एवं आधार माना है।
इसलिए, हर प्राचीन सभ्यता और धार्मिक परंपरा में प्रकाश और अग्नि का विशेष स्थान रहा है।
लेकिन प्रकाश का एक और गहरा अर्थ भी है।
यह 'ज्ञान' का प्रतीक है।
जिस तरह अंधेरे में स्पष्ट रुप से देखने और अपना रास्ता खोजने के लिए हमें भौतिक प्रकाश की आवश्यकता होती है, उसी तरह जीवन को समझने, सही और गलत के बीच अंतर करने और सत्य का मार्ग खोजने के लिए हमें 'ज्ञान' के प्रकाश की आवश्यकता होती है।
वेद इस आकांक्षा को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त करते हैं:
'तमसो मा ज्योतिर्गमय'
अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें।
ये शब्द केवल दोहराने के लिए नहीं हैं।
ये उस बदलाव की ओर संकेत करते हैं जिसे हमें अपने जीवन में लाने का प्रयास करना चाहिए।
महात्मा बुद्ध ने कहा था: 'आत्म दीपो भव' - अर्थात स्वयं अपना प्रकाश बनें।
हमें अवश्य ही दूसरों से - अर्थात शिक्षकों, गुरुओं, ज्ञानी एवं अनुभवी लोगों के मार्गदर्शन की आवश्यकता तो होती है। परन्तु ध्यानयोग्य है कि दूसरे लोग हमारा मार्गदर्शन तो कर सकते हैं लेकिन अंततः, हमें किसी और पर आँख मूंदकर निर्भर रहने के बजाय, अपनी स्वयं की समझ और विवेक को विकसित करना चाहिए।
दीपक अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन प्रकाश एक ही होता है।
बाहरी अंधकार तो सूर्योदय के साथ अपने आप मिट जाता है।
लेकिन हमारे मन के भीतर का अंधकार अपने आप दूर नहीं होता।
इसे दूर करने के लिए ज्ञान, सोच विचार, आत्म-चिंतन और सच्चे प्रयासों की आवश्यकता होती है।
दीवाली का गहरा अर्थ - मन की शुद्धि
परंपरागत रुप से, दीवाली का समय घरों की सफाई करने, पुरानी और अनावश्यक वस्तुओं को निकाल कर नई चीजें लाने का भी होता है।
यही बात हमें अपने मन पर भी लागू करनी चाहिए।
जैसे हम घने अंधेरे में किसी कमरे को ठीक से साफ नहीं कर सकते। सफाई के लिए और हर चीज को उसकी सही जगह पर रखने के लिए प्रकाश की ज़रुरत पड़ती है।
उसी तरह, अपने मन को परखने और संवारने के लिए हमें सत्य के ज्ञान के प्रकाश की आवश्यकता पड़ती है ताकि हम पुरानी पड़ चुकी मान्यताओं, पूर्वाग्रहों, गलत धारणाओं और बेकार के अंधविश्वासों को हटा सकें, और नए व लाभकारी विचारों के लिए जगह बना सकें।
आइए - इस दीपावली पर हम केवल अपने घरों और आस-पास के वातावरण को ही रोशन न करें, बल्कि अपने मन को भी 'ज्ञान' के प्रकाश से जगमगाने का प्रयास करें।
केवल पुराने कपड़ों और सामान को ही न हटाएं, बल्कि अपने पुराने और अनावश्यक विचारों एवं अन्धविश्वास को भी त्यागने का प्रयास करें।
'नाम और रुप' की सीमाओं से ऊपर उठें और अपने चहुं ओर व्यापक इस असीम और निराकार शाश्वत वास्तविकता को पहचानें।
प्रार्थना:
यह दीपावली सभी के जीवन में खुशियां, अच्छा स्वास्थ्य, समृद्धि, विवेक और समझ लेकर आए। हर तरफ प्रेम, दया, एकता और सद्भावना का प्रसार हो।
तमसो मा ज्योतिर्गमय – अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें।
असतो मा सद्गमय – असत्य से सत्य की ओर ले चलें।
मृत्योर्मा अमृतं गमय – नश्वरता से अमरता की ओर, और बंधनों से मुक्ति की ओर ले चलें।
सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!
परमपिता निराकार प्रभु की कृपा सभी पर बनी रहे।
" राजन सचदेव "




