Thursday, August 6, 2026

दोष ना दीजे बरसता देख बादल को - दिल को हल्का करने का हक़ तो सभी को है

राह-ए-हक़ पे चलने का हक़ तो सभी को है
आगे बढ़ते रहने का हक़ तो सभी को है

दोष ना दीजे बरसता देख बादल को 
दिल को हल्का करने का हक़ तो सभी को है 

आपकी मर्ज़ी है मानो या ना मानो, पर 
बात अपनी कहने का हक़ तो सभी को है 

सोच सब की अपनी है - अपने ख़्याल हैं 
अपने ढंग से रहने का हक़ तो सभी को है 

देख कर उड़ता किसी को रश्क़ ना कीजे 
'राजन' ऊँचा उठने का हक़ तो सभी को है 
                       " राजन सचदेव " 

रश्क़ =  ईर्ष्या   Jealousy, Envy 

5 comments:

  1. Wah wah ji...nice poetery
    Ashok Chaudhary

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  2. WAH KYA BAT HAI MERE SAJN PYARE MAHAN MAHAN MAHAN VIDVAN MAHAN SHAYER SATKAR YOG .."RAJN SCHDEVA "JEE

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  3. Great thoughts ji

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  4. 🙏🎊👍👌very nice ji 🎊

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दोष ना दीजे बरसता देख बादल को - दिल को हल्का करने का हक़ तो सभी को है

राह-ए-हक़ पे चलने का हक़ तो सभी को है आगे बढ़ते रहने का हक़ तो सभी को है दोष ना दीजे बरसता देख बादल को  दिल को हल्का करने का हक़ तो सभी को है  आप...