रौशनी कभी शोर नहीं मचाती कि वह दुनिया को रौशन कर सकती है,
न ही वह अंधेरे से बहस करती है।
वो तो बस चमकती है और अपने आस-पास की हर चीज़ को रौशन कर देती है।
सत्य और नेकी एवं भलाई के कामों को विज्ञापन की ज़रुरत नहीं होती।
सच्चे संत न तो शोहरत, प्रसिद्धि, विख्याति अथवा दूसरों से मान्यता की अपेक्षा करते हैं और न ही वो लोगों से बहस करके जीतना चाहते हैं।
वो तो अपने विवेक और नेक कर्मों के कारण स्वयंमेव ही उद्घाटित और लोक-प्रिय बन जाते हैं और अंततः लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेते हैं।
" राजन सचदेव "
In your characteristic style, simple & effective. Thanks a lot for sharing your wisdom with us!
ReplyDeleteयही तो सत्य की विशेषता है और सत्य की अनुभूति युक्त महात्मा का स्वभाव ही मानवता को पोषण देने वाला बन जाता है और कह उठता है ना काहू से दोस्ती ना काहू से वैर
ReplyDeleteBahut hee Uttam bachan ji .🙏
ReplyDeleteSatya Vachan
ReplyDeleteSo very true! To be genuinely good without competing with or expecting recognition from others. Very nice!
ReplyDelete🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteDarkness have its own value. Light needs darkness too. If ignorance exits then need arises of knowledge.
ReplyDelete🙏🙏uttam atti Uttam🙏🙏
ReplyDeleteराजन जी 🙏. आप हमारे जीवन में ज्ञान रूपी रौशनी प्रदान कर रहे हैं ।
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