Wednesday, June 10, 2026

रौशनी कभी अंधेरे से बहस नहीं करती

रौशनी कभी शोर नहीं मचाती कि वह दुनिया को रौशन कर सकती है,
न ही वह अंधेरे से बहस करती है। 
वो तो बस चमकती है और अपने आस-पास की हर चीज़ को रौशन कर देती है। 

सत्य और नेकी एवं भलाई के कामों को विज्ञापन की ज़रुरत नहीं होती।
सच्चे संत न तो शोहरत, प्रसिद्धि, विख्याति अथवा दूसरों से मान्यता की अपेक्षा करते हैं और न ही वो लोगों से बहस करके जीतना चाहते हैं। 
वो तो अपने विवेक और नेक कर्मों के कारण स्वयंमेव ही उद्घाटित और लोक-प्रिय बन जाते हैं और अंततः लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेते हैं। 
                                                  " राजन सचदेव "

9 comments:

  1. In your characteristic style, simple & effective. Thanks a lot for sharing your wisdom with us!

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  2. निर्मल सोनीJune 10, 2026 at 9:29 AM

    यही तो सत्य की विशेषता है और सत्य की अनुभूति युक्त महात्मा का स्वभाव ही मानवता को पोषण देने वाला बन जाता है और कह उठता है ना काहू से दोस्ती ना काहू से वैर

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  3. Bahut hee Uttam bachan ji .🙏

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  4. So very true! To be genuinely good without competing with or expecting recognition from others. Very nice!

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  5. Darkness have its own value. Light needs darkness too. If ignorance exits then need arises of knowledge.

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  6. 🙏🙏uttam atti Uttam🙏🙏

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  7. राजन जी 🙏. आप हमारे जीवन में ज्ञान रूपी रौशनी प्रदान कर रहे हैं ।

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रौशनी कभी अंधेरे से बहस नहीं करती

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