आशाएं और अपेक्षाएं केवल स्वयं से ही रखें।
दूसरों से अपेक्षा रखने की बजाय, स्वयं पर भरोसा रखें - अपने आप से ही ज़्यादा उम्मीदें एवं अपेक्षाएं रखें।
दूसरों से अपेक्षाएं अक्सर निराशा, क्रोध और ग्लानि का कारण बन जाती हैं,
क्योंकि हो सकता है कि लोग हमारी आशा के अनुरुप बर्ताव न करें और वैसा जवाब न दें जैसा हम उनसे चाहते हैं।
लेकिन स्वयं से की गई अपेक्षाएं विकास और बदलाव का साधन बन सकती हैं।
ये हमें और ज़्यादा मेहनत करने, स्वयं को बेहतर बनाने और अपनी वर्तमान स्थिति एवं सीमाओं से ऊपर उठने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
जब हम अपना ध्यान दूसरों से अपेक्षा रखने की बजाए स्वयं को बेहतर बनाने पर केंद्रित करने लगते हैं तो हमारा जीवन अधिक अर्थपूर्ण और शांतमय होने लगता है।
" राजन सचदेव "
Absolutely very true ji . 🙏
ReplyDeleteBilkul sahi kaha ji🙏
ReplyDeleteZero expectations from others is a key to happiness
ReplyDeleteSatya Vachan!
ReplyDeleteDhan Nirankar ji 🙏 very true ji thanks 🙏
ReplyDeleteSahi baat
ReplyDeleteउत्तम सीख राजनजी 🙏🙏
ReplyDeleteIt’s true & I need to implement this.
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