Friday, July 31, 2026

अहंकार में तीनों गए धन वैभव और वंश

                   अहंकार में तीनों गए धन वैभव और वंश
                     न मानो तो देख लो रावण, कौरव कंस 
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अहंकार मनुष्य के जीवन में एक मौन विनाशक है। 
यह केवल धन, वैभव और सत्ता ही नहीं, बल्कि परिवार की प्रतिष्ठा, वंश की मर्यादा और जीवन की उपलब्धियों तक को नष्ट कर देता है। 
व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली, विद्वान या समृद्ध क्यों न हो, यदि उसके भीतर अहंकार घर कर जाए तो उसका पतन निश्चित हो जाता है।

यदि प्रमाण चाहिए, तो रावण, कौरवों और कंस का इतिहास देख लीजिए। 
अपार शक्ति, असीम संपत्ति और विशाल साम्राज्य होने के बावजूद, उनका अहंकार ही उनके सर्वनाश का कारण बना। 
 जहाँ विनम्रता जीवन को ऊँचा उठाती है, वहीं अहंकार अंततः सब कुछ छीन लेता है।
अहंकार वह अग्नि है जो सबसे पहले उसी व्यक्ति को जलाती है, जिसके भीतर वह जन्म लेती है। 
अहंकार मनुष्य के विवेक को ढक देता है, सत्य को स्वीकार करने की क्षमता छीन लेता है और उसे अपने सामर्थ्य, धन, पद तथा ज्ञान का मिथ्या अभिमान करा देता है। 
परिणामस्वरुप, धन, वैभव, यश, सत्ता और यहाँ तक कि वंश की प्रतिष्ठा भी टिक नहीं पाती।
इसीलिए संतों ने कहा है—
           अहंकार में तीनों गए  धन, वैभव और वंश 
              न मानो तो देख लो, रावण, कौरव, कंस 

रावण अतुलनीय विद्वान, महान तपस्वी और स्वर्ण-लंका का सम्राट था। 
कौरवों के पास विशाल राज्य, अपार सेना और असाधारण सामर्थ्य था। 
कंस भी अत्यंत शक्तिशाली राजा था। 
परंतु अहंकार ने उनकी दृष्टि को इतना संकुचित कर दिया कि वे सत्य और धर्म के मार्ग से हट गए और परिजनों के दिए गए उचित परामर्श को भी स्वीकार न कर सके। और अंततः पतन के शिकार हो गए।  
इसलिए जीवन में यदि किसी एक दोष से सबसे अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है, तो वह है अहंकार। 

विनम्रता ही इंसान को महान बनाती है और उसे ईश्वर के निकट ले जाती है, जबकि अहंकार उसे अपने ही बनाए अंधकार में भटका देता है। 
शास्त्र कहते हैं कि जहाँ अहंकार समाप्त होता है, वहीं से ज्ञान, प्रेम और ईश्वर की कृपा का द्वार खुलता है। 
इसलिए, इंसान को विनम्र रहना चाहिए। 

स्वाभिमान होना अच्छी बात है, लेकिन स्वयं को बहुत ज्ञानी और दूसरों से बहुत बड़ा समझना और घमंड करना अच्छी बात नहीं।
विनम्र रहकर और दूसरों का सम्मान करते हुए सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयत्न करें।
                                  " राजन सचदेव "

5 comments:

  1. Excellent.Bahut hee Uttam aur shikhshadayak Bachan ji .🙏

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  2. Very true. Very well written with just the right examples.
    🙏🙏🙏 Sudha Saraswat

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  3. धन निरंकार जी
    ,,अति सुन्दर वियख्या,,

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  4. 🙏🙏Beautiful. Jk

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