Thursday, March 26, 2026

राम नवमी की शुभ कामनाएँ एवं प्रयोजन

                               



  




















     मर्यादा पुरुषोत्तम राम 

भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है -  
जो हमेशा अपनी मर्यादा पर क़ायम रहे - हमेशा मर्यादाओं का पालन करते रहे - कभी किसी भी परिस्थिति में धर्म तथा मर्यादा का साथ नहीं छोड़ा। 

                             मर्यादा क्या है?

अक़्सर मर्यादा को परिवार, कुल, अथवा किसी विशेष समाज या वर्ग के संस्कारों से जोड़ कर देखा जाता है। 
मर्यादा का सही अर्थ है सत्य एवं मानवता के धर्म का पालन, मानवता और सत्य के पथ पर अडिग रहना। 
जहां भगवान राम ने परिवार समाज और देश-धर्म की मर्यादाओं का पालन किया, वहीं मानवता की मर्यादाओं का भी पूर्णरुप से पालन किया। 

                                       मानवता की मर्यादाएं :

दया, धर्म, तप, धैर्य, सत्य, शील, संतोष, प्रेम एवं विनम्रता, निष्कपटता अर्थात कभी किसी से छल-कपट न करना, किसी का धन न छीनना, दूसरों के प्रति मात्सर्य भाव न रखते हुए अपनी नेक कमाई में ही संतुष्ट एवं प्रसन्न रहना इत्यादि इत्यादि।**

राम नवमी मनाने का अर्थ केवल भगवान राम की प्रशंसा एवं गुण गान करना ही नहीं है। 
राम नवमी मनाना तभी सफल हो पाएगा जब हम भगवान राम के इन मानवीय गुणों को अपने जीवन में धारण करने का प्रयास करेंगे। 
                                  "  राजन सचदेव "

**नोट :  
प्राचीन धर्म शास्त्रों में बार बार इन मानवीय गुणों का वर्णन मिलता है: 
उदाहरण के तौर पर: 
           मा गृधः कस्य स्विद्धनम  
                              " ऋग्वेद "
(किसी का धन छीनने का प्रयास मत करो) 

यल्ल्भसे निज कर्मोपातन वित्तम तेन विनोदय चित्तं 
अपनी नेक कमाई से जो मिले उसी में अपने मन को संतुष्ट और विनोदित - प्रसन्न रखो) 
                     (आदि शंकराचार्य) 

 राम चरित मानस में नवधा भक्ति का वर्णन करते हुए भगवान राम कहते हैं: 
 
              छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा ।।
(इंद्रियों पर नियंत्रण, विनम्र स्वभाव, सब कार्य करते हुए भी वैराग्य अर्थात अनासक्ति - हमेशा सज्जनता से आचरण करना)
             सातवं सम मोहि मय जग देखा । मोते संत अधिक करि लेखा ।।
(समानता की दृष्टि से देखना - सबके साथ समानता का व्यवहार) 

             आठवं जथा लाभ संतोषा । सपनेहु नहि दखइ परदोषा । 
(जो मिल जाए उसी में संतोष करना - किसी के दोष न देखना) 

               नवम सरल सब सन् छल हीना ।  मम भरोसा हित हरष न दीना ।। 
(सब के साथ सरलता से- आत्मीयता से पेश आना - छल कपट न करना                 
ईश्वर पर भरोसा एवं आत्मविश्वास के साथ किसी भी परिस्थिति में हर्ष और विषाद न रखना - विचलित न होना) 

और भगवद गीता तथा अन्य कई धर्म ग्रंथों में भी ऐसे कितने ही उदाहरण मिल जाएंगे। 
                               "  राजन सचदेव "


3 comments:

  1. Happy Ram Navami 🙏🙏

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  2. 🙏 Bahoot Sunder 🙏 Ham Mansa, vacha, karmana kisi ka bura na kare. Itni shakti do Mere Ram!

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