Thursday, February 19, 2026

कबीर गर्व न कीजिए

कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग 
आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग ।

कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास 
आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास ।

कबीर गर्व ना कीजिए काल गहें कर केस 
ना जाने कित मारीये क्या घर क्या परदेस।

कबीर गर्व न कीजिए – रंक न हसिए कोय 
अजहूँ नाव समुंद में, क्या जाना क्या होय।

कबीर एह तन जाएगा सको तो लेहु बहोरि 
नांगे पाँव ते गए जिन के लाख करोरि 

कबीर बेड़ा जर्जरा फूटे छेक हज़ार 
हरुए हरुए तर गए डूबे जिन सिर भार 

(हरुए हरुए = हल्के हल्के ) 

सतगुरु कबीर जी के कहे हुए  उपरोक्त महान वचन हमें जीवन की नश्वरता और हमारे अहम और अहंकार के खोखलेपन का एहसास करवाते हैं। 
               " राजन सचदेव "


8 comments:

  1. Beautiful reminders Jì 🙏

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  2. Tuhi Nirankar 🙏🙏

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  3. Bahut hee Shikshadayak bachan ji .🙏

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  4. I have always loved Satguru Kabir Ji's dohas. SO much to learn from. another doha I like along the same lines is
    दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय। मुई खाल की धौंकनी, लोह भस्म हो जाय॥

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  5. "Pride hath a fall"...an apt quote to support Bhagat Kabir's "Pearls of Wisdom" couplets. Present times emerging trends in entire global space is ridden with inflated ego and display of show off culture.

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