Saturday, February 14, 2015

ना जाने कहाँ ज़िन्दगी की शाम आएगी


न जाने कहाँ पे ज़िन्दगी की शाम आएगी
​भला क्या मौत​ कोई भेज के पैग़ामआएगी

अक़्ल का या दानाई का तो सौदा नहीं है इश्क़
अना तो लौट के हर  बार ही नाकाम आएगी 

अगर देखोगे तुम इसको नए अंदाज़ से यारो
तुम्हारी ज़िन्दगी ले के नया पैग़ाम आएगी


मोहब्बत के लिए यारो ख़लूसे दिल भी लाज़िम है 

वफ़ा बेग़रज़ ही ले के ख़ुशी का जाम आएगी 

कहता तो ​बहुत कुछ है मगर करता नहीं कुछ भी
लगता है कि ये तोहमत​
 ​​भी मेरे​ ​नाम आएगी 


लड़ के भी ज़माने से भला 'राजन' मिलेगा क्या
आएगी अगर तो आजिज़ी ही काम आएगी
​                                     " राजन सचदेव "





दानाई ​             Knowledge , wisdom
अना                ग़रूर   Ego 
नाकाम​            Without Success / unsuccessful
नए अंदाज़ से    From a new angle 
​ख़लूसे- दिल  ​   Purity of heart 
​लाज़िम            Necessary 
वफ़ा बेग़रज़    Love without selfish motive
​तोहमत​           Blame
​आजिज़ी         Humility









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