Monday, January 5, 2015

है तमन्ना मंज़िल की तो

है तमन्ना मंज़िल की तो रास्ता देखा ना कर 
एक दामन थामकर फिर  दूसरा देखा ना कर       


कोई भी रहता नहीं अपना हमेशा के लिए 
इक सिवाए रब के  दूजा आसरा देखा ना कर  

देखना खुद को ज़रूरी  है  संवरने के लिए 
पर करे मग़रूर जो, वो आइना देखा ना कर      

बख़्शा है गरचे ख़ुदा ने दिल तुझे फितरत-शनास
हर किसी में हुनर देखा कर, बुरा देखा ना कर

हर बशर की ज़िंदगी में होती हैं मजबूरियाँ 
हर किसी को हर समय शक़ की निगाह देखा ना कर

वो अगर देखें तो देखें,  दुशमनी की नज़र से 
वास्ता रब का ऐ दिल, तू इस तरा ' देखा ना कर   

चाहता है गर, ना तेरी ख़ामियां देखे कोई 
दूसरों की खामियाँ भी ख्वामखाह देखा ना  कर 

क्या ज़रूरत है कि 'राजन' सबसे हम कहते फिरें 
इस तरह देखा ना कर तू उस तरा '  देखा ना कर   

                                         ' राजन सचदेव '
                              2 जनवरी, 2015 

2 comments:

  1. Excellent and very inspiring set of couplets.

    ReplyDelete

Choose Your Battles Wisely...

An elephant took a bath in a river and was walking on the road.  When it neared a bridge, it saw a pig fully soaked in mud coming from the...